Sponsored
Sponsored
Read नास्तिक की प्रार्थना
Free Edition
Verified Content

नास्तिक की प्रार्थना

3.71 • 18 ratings • 3 reviews
Overview
नास्तिक की प्रार्थना मानव कौल का कविता-संग्रह है। कविताओं की ओर लौटने, अपने भीतर के घर में वापस आने और बरसों से बची हुई बात को कह पाने की बेचैनी से जन्मी किताब।
मानव कौल ने अपनी रचनात्मक यात्रा की शुरुआत कविताओं से की थी। फिर नाटक, कहानियाँ और उपन्यास लिखते-लिखते वे अपनी ही भाषा से जैसे कुछ दूर चले गए। भीतर एक भूख बनी रही, घर लौटने की, अपनी पहली आवाज़ तक पहुँचने की। उनके लिए यह घर कविताएँ थीं।

एक उपन्यास पर काम करते हुए जब उसका अंत एक कविता में खुला, तब उन्हें लगा कि वे फिर अपने घर के आसपास हैं, उसकी गलियों, आँगन और गंध के पास। उसी क्षण से कविताएँ लौटने लगीं। यह संग्रह उसी लौटने की यात्रा है।

‘नास्तिक की प्रार्थना’ उन कविताओं की किताब है, जो ‘कुछ कहना छूट गया है’ की टीस और भूख से निकली हैं। इसमें आत्मीयता है, बेचैनी है, स्मृति है और वह स्वाद है, जो लंबे समय बाद घर के खाने में मिलता है।

यह संग्रह पाठक को भी अपने भीतर के किसी पुराने, भूले हुए घर तक ले जा सकता है।
User Avatar User Avatar User Avatar
36,114 currently reading
User Avatar User Avatar User Avatar
152,889 want to read
Sponsored
Sponsored

Book details & editions

ISBN 8119555708
Publisher
Publication date May 2026
Language Hindi
Pages 136 pages
Sponsored
Sponsored
About the Author
Manav Kaul

Manav Kaul

Follow
Known for writing in a clear, engaging, and easy-to-follow style. The work feels natural and flows smoothly, making it enjoyable from beginning to end.

Ratings & Reviews

5 ★
42%
4 ★
34%
3 ★
16%
2 ★
5%
1 ★
3%
3.71
BlueReads Choice
Sponsored

Write a Review

Community Reviews

Sort by:
Sponsored
Sponsored
Sponsored Content